साधक साधना में उपयोग की सामग्री (नैवेद्य, भोग) तथा अपना भोजन स्वयं तैयार करें। वज्र पानी पिबेच्चांगे डाकिनी डापिनी रक्षोव सर्वांगे। ब्रह्मचर्य व्रत का पूर्ण रूप से पालन करें। अपने गुरु एवं परमात्मा पर पूर्ण विश्वास और श्रद्धा रखें। तीर पतर लियो हाथ, चौसठ जोगनिया खेले पास। आध्यात्मिक उन्नति: हनुमान https://josephy097bjp3.blogunteer.com/profile